मनष्य के आस-पास प्रकृति का वह रूप जा उससे किसी न किसी रूप में अतं र्सबं ंधित है-वही पर्यावरण है। पयार्व रण सस्ं कृत का शब्द है जा परि और आवरण से मिलकर बना है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है चारों तरफ से घेरना। अर्थात् मनुष्य पर्यावरणीय तत्वों से चारों तरफ से घिरा हुआ है। उन पर्यावरणीय तत्वों का जीवों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। पर्यावरण अध्ययन का मुख्य उद्देश्य स्वयं को और जनसमूह को पर्यावरण के प्रति सचेत करना है और उसका महत्व समझाना है ताकि लोग पर्यावरण की रक्षा करने में अपना योगदान दें और पर्यावरण का ह््रास होने से बचाएं। हमारे चारों ओर उपस्थित जैविक और अजैविक घटकों का अध्ययन पर्यावरण अध्ययन कहलाता है। पर्यावरण अध्ययन की सहायता से हम पयार्व रण से जीवां का होने वाले लाभ और हानि की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। पर्यावरण शिक्षा से हम पर्यावरण क्षरण को भी कम कर सकते हैं। म्दअपतवदउमदज शब्द फ्रेंच भाषा के म्दअपतवदमत शब्द से उद्धृत हुआ है-जिसका तात्पर्य है- “जीवों को आच्छादित करने वाले समस्त जैविक और अजैविक पदार्थ जो पर्यावरण की कोटि में आते हैं।“ जर्मन पर्यावरण वैज्ञानिक एच. फिटिंग ने सन् 1922 में कहा था- “जीवों के पारिस्थितिकीय कारकों का योग पर्यावरण है।” पर्यावरण और मानव जीवन 2 आइन्स्टीन के शब्दां म-ें “हमें छाडे ़कर हमारे चारां आरे उपस्थित सम्पण्ूर् भाग पर्यावरण कहलाता है।“ पर्यावरण की संरचना समझने के लिए उसके घटक और भाग को समझना होगा। पर्यावरण पृथ्वी के मुख्य भाग से मिलकर बना होता है। पर्यावरण के घटक और उसके भाग सम्मिलित रूप से पर्यावरण को निर्मित करते हैं, जो निम्नलिखित है-
📌 पर्यावरण और मानव जीवन (Atmakur)
🏢 Ebookselibrary
📍 Atmakur
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